रिटायर्ड जस्टिस केके गुप्ता ने दी हैं कई ऐतिहासिक जजमेंट, जम्मू के डोगरा की दिलचस्प कहानी आप भी पढ़िए।

 

जम्मू संवाद, अमित अजरावत: जम्मू का नाम विश्व में प्रसिद्ध है, जम्मू की धरती से कई बड़ी हस्तियां भी रहीं हैं, जिसमें रिटायर्ड जस्टिश केके गुप्ता भी हैं। जस्टिस केके गुप्ता जम्मू कश्मीर का एक जाना माना नाम है। आज हम आपको सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता की जीवनी के बारे में बताएंगे।

 

सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता का जन्म 19 अक्टूबर 1930 को फकीर चंद गुप्ता और दुर्गा देवी के घर में हुआ। जस्टिस केके गुप्ता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उधमपुर से पूर्ण की जिसके बाद उन्होंने डीएवी स्कूल, श्रीनगर से अपनी माध्यमिक और एस आर हाई स्कूल से 9वीं कक्षा की पढ़ाई उतीर्ण की। वहीं इसके उधमपुर से मैट्रिक करने के बाद सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता ने सन 1950 में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की जबकि 1952 में दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री भी हासिल कर ली। इस दौरान जस्टिस केके गुप्ता जी को श्रीनगर में अभियोजन निरीक्षक और जीएडी पुलिस प्रशिक्षण के रूप में चुना गया और इसी बीच उन्होंने केसीएस यानि जम्मू कश्मीर की जूडिशियल सर्वीस भी उतीर्ण कर लिया और उन्हें 1960 रामबण कोर्ट में मुंसिफ के पद पर तैनात किया गया और यहीं से न्यायपालिका में उनके करियर की शुरुआत हुई।

 

अलग अलग जगह पर मुंसिफ रहने के बाद वह उप-न्यायधीश रहे और डिस्ट्रीक्ट सेशन जज भी रहे। इसके बाद सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता सीजेएम जम्मू, विजीलेंस कमीश्नर और जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार भी रहे। वहीं लोअर कोर्ट में करीब 28 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने के बाद केके गुप्ता जी को अगस्त 1984 में जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट में न्यायधीश के रुप में पदोन्नत किया गया इस दौरान वे अपने 8 वर्षों के कार्यकाल में कुछ समय के लिए जेके हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायधीश भी रहे और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐतिहासिक जजमेंट्स भी दीं।

 

ईमानदारी और अपने काम के प्रति निष्ठावान होने के कारण उन्हें सेवानिवृत होने पर कई आयोगों का प्रमुख भी बनाया गया  था। उनके नेतृत्व वाले आयोग में परिसीमन आयोग, जम्मू-कश्मीर पिछड़ा वर्ग आयोग, 1997 में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच आयोग, जम्मू-कश्मीर के कैबिनेट मंत्री मौलाना अंसारी के खिलाफ जांच आयोग और 2006 में श्री अमरनाथ जी शिवलिंग विवाद की जांच के लिए आयोग में शामिल हैं। जिस्टिस गुप्ता को धर्मार्थ ट्रस्ट का अध्यक्ष भी बनाया गया जिसे 1846 में डोगरा वंश के संस्थापक, महाराजा गुलाब सिंह द्वारा धार्मिक दान के लिए एक बंदोबस्ती और हिंदू धर्म के प्रबंधन और समर्थन के लिए बनाया गया था। जस्टिस केके गुप्ता जी को धीरेंद्र ब्रह्मचारी ट्रस्ट का चेयरमैन भी बनाया गया था। जस्टिस गुप्ता जी को जम्मू संभाग के साथ-साथ कश्मीर जिसमें माता खीर भवानी औ शंकराचार्य मंदिर समेत कई मंदिरों के जीर्णोद्धार और रखरखाव के लिए धन जुटाने का गौरव प्राप्त है। वह जस्टिस मेहर चंद महाजन चैरिटेबल हेल्थ केयर सेंटर, गांधी नगर की स्थापना में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। जस्टिस गुप्ता अखिल भारतीय महाजन शिरोमणि सभा, जम्मू के चीफ पैटरान भी रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि जस्टिस गुप्ता ने हमेशा अपने जंडियाल समुदाय के मामलों में गहरी दिलचस्पी ली है, और खुद को इसकी बेहतरी के लिए समर्पित कर दिया है। अखिल जंडियाल सभा के मुख्य संरक्षक के रूप में उन्होंने गोल पुली, तालाब तिल्लो, जम्मू में बाबा सहजनाथ जी के देवस्थान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह जंडियाल बिरादरी का पवित्र देवस्थान

 

सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता जी ने 1950 में श्रीमती विष्णु रानी जी शादी रचाई। जस्टिस गुप्ता और विष्णु रानी जी के चार बच्चें हैं दो बेटियां और दो बेटे। उनके दोनों बेटे- अनिल गुप्ता और सुनील गुप्ता इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और पीडीडी में मुख्य अभियंता के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके सबसे बड़े दामाद, सीए सुदर्शन गुप्ता थे जिनका स्वर्गवास हो गया है जबकि अन्य दामाद डॉ रतन कुडियार हैं, जो जम्मू के सबसे प्रसिद्ध मधुमेह रोग विशेषज्ञ और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं

 

सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता जी के परिवार का भी मानना है कि परिवार भी उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से एक सफल परिवार बना है और आज भी जरुरतमंद लोगों की मदद करता आ रहा है। उनके दादा स्वर्गीय श्री.शिव राम भद्रवाह में तहसीलदार थे, जहां से उन्हें श्रीनगर स्थानांतरित कर दिया गया, और टंकीपोरा में उन्होंने अपने घर का निर्माण भी किया । जस्टिस केके गुप्ता के पिता, स्वर्गीय श्री फकीर चंद गुप्ता एक लेखा अधिकारी थे, जिन्होंने कराची, हैदराबाद, कलकत्ता और दिल्ली में अपनी सेवाएं दी थी। उनके तीन भाई-बहन थे, जिसमें बड़े भाई श्री पीएल गुप्ता जम्मू-कश्मीर में लॉ सेकरेट्री थे और बाद में केंद्रीय कानून मंत्रालय में शामिल हो गए, जहां वे संयुक्त सचिव के पद तक पहुंचे, साथ ही उन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा कानूनी सलाहकार भी चुना गया था फिर त्रिनिदाद पोर्ट और सिएरा लियोन में तैनात कर दिया गया था। इसके बाद वे यूएसए में ही सेटल हो गए थे और 94 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके दूसरे भाई डॉ. डीआर गुप्ता बड़े व्यवसायी थे, उनके चार बेटे थे जिसमें दो डॉक्टर और दो लीगल प्रोफेशन में थे। उनके बड़े बेटे, एडवोकेट सुशील गुप्ता अतिरिक्त महाधिवक्ता थे और बहुत कम उम्र में उनकी मृत्यु हो गई जबकि उनके दूसरे बेटे वीके गुप्ता भी जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय जस्टिस थे।

91वें वर्ष के सेवानिवृत जस्टिस केके गुप्ता आज भी ज़मीनी सतह से जुड़े हैं और आज भी वह जरुरतमंद लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।

जम्मू संवाद नेटवर्क